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इमरजेंसी फंड कहां रखें, सही फैसला नहीं लिया तो पड़ सकते हैं मुश्किल में

आज के अनिश्चित दौर में इमरजेंसी फंड हर व्यक्ति की वित्तीय सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार बन चुका है। यह वह रकम होती है जिसे खासतौर पर अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखा जाता है। जैसे अचानक बीमारी, नौकरी छूटना या किसी जरूरी मरम्मत का खर्च। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको मुश्किल समय में कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती और आपके लॉन्ग टर्म निवेश भी सुरक्षित रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी फंड का मकसद ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं बल्कि जरूरत के समय तुरंत पैसा उपलब्ध कराना होता है। इसलिए इसे बनाते समय सबसे पहले लिक्विडिटी यानी पैसे की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

लिक्विडिटी क्यों है सबसे बड़ा फैक्टर

इमरजेंसी फंड के लिए सही विकल्प चुनते समय सबसे जरूरी बात यह होती है कि पैसा कितनी जल्दी निकाला जा सकता है। अगर किसी स्थिति में तुरंत पैसे की जरूरत है, तो ऐसे विकल्प का चुनाव करना चाहिए जहां बिना देरी के पैसा मिल सके। इस मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। हालांकि सेविंग अकाउंट में भी पैसा आसानी से उपलब्ध रहता है, लेकिन आमतौर पर लोग उसमें बड़ी रकम नहीं रखते। इसलिए एफडी ऐसा विकल्प है जो जरूरत पड़ने पर जल्दी टूट सकता है और पैसा तुरंत उपलब्ध हो जाता है।

म्यूचुअल फंड कब बन सकते हैं बेहतर विकल्प

अगर आपकी इमरजेंसी ऐसी है जिसमें आपको 2 से 3 दिन का समय मिल सकता है, तो म्यूचुअल फंड भी एक अच्छा विकल्प बन सकते हैं। खासकर लिक्विड फंड और ओवरनाइट फंड इस स्थिति में बेहतर माने जाते हैं। इन फंड्स में पैसा अपेक्षाकृत जल्दी मिल जाता है और टैक्स के लिहाज से भी कुछ फायदे मिल सकते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड में पैसा तुरंत नहीं मिलता और आमतौर पर 2 से 3 वर्किंग दिन लग सकते हैं। इसलिए गंभीर और तत्काल जरूरत के लिए यह विकल्प उतना उपयुक्त नहीं होता जितना कि एफडी या सेविंग अकाउंट।

टैक्स और रिटर्न से पहले सोचें सुरक्षा और सुविधा

इमरजेंसी फंड बनाते समय टैक्स और रिटर्न को प्राथमिकता देना सही रणनीति नहीं मानी जाती। सबसे पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जरूरत के समय पैसा बिना किसी परेशानी के तुरंत मिल जाए। आमतौर पर कम टैक्स ब्रैकेट वाले लोगों के लिए एफडी एक आसान और सुरक्षित विकल्प होता है। वहीं ज्यादा टैक्स देने वाले निवेशक डेट म्यूचुअल फंड पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इनमें टैक्स के बाद बेहतर रिटर्न मिल सकता है। कुल मिलाकर इमरजेंसी फंड का उद्देश्य सुरक्षा और सुविधा है, न कि ज्यादा मुनाफा कमाना। इसलिए सोच समझकर सही विकल्प चुनना बेहद जरूरी है।

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