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मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में दबाव क्यों बना हुआ है समझिए कारण

हाल के दिनों में भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे काफी मजबूत रहे हैं। खासकर प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया है जिसमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन बैंकों के मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, अंबुजा सीमेंट्स, कोफोर्ज, टाटा टेक, मैरिको, हीरो मोटो कॉर्प और पीएनबी जैसी कई कंपनियों ने भी मजबूत परिणाम दिए हैं। करीब दो दर्जन से अधिक कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इसके बावजूद शेयर बाजार में वह उत्साह नहीं दिखा जो आमतौर पर ऐसे परिणामों के बाद देखने को मिलता है।

बाजार की अनिश्चित चाल और निवेशकों की सावधानी

शेयर बाजार की चाल इन अच्छे नतीजों के बावजूद अस्थिर बनी हुई है। 4 मई को बाजार ने दिन के दौरान लगभग 1000 अंकों की बढ़त दिखाई लेकिन अंत में यह करीब 350 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके बाद अगले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दबाव में नजर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार केवल घरेलू नतीजों से प्रभावित नहीं हो रहा है बल्कि वैश्विक और आर्थिक कारक इसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं क्योंकि बाहरी जोखिम बढ़ गए हैं और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की कमजोरी

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी से आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देश पर लागत का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर रुपया भी लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर को पार कर गया है। इससे आयात महंगा हो रहा है और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति महंगाई और कंपनियों की कमाई दोनों पर असर डाल सकती है जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव का असर

शेयर बाजार में लगातार दबाव का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी है। इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं जबकि केवल इस महीने में ही हजारों करोड़ की निकासी हुई है। हालांकि कभी कभी खरीदारी देखने को मिलती है लेकिन वह स्थायी नहीं मानी जा रही। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहा भू राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति भी बाजार पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती तब तक बाजार में मजबूत रिकवरी की संभावना सीमित रहेगी।

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