शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के 3.27 लाख करोड़ रुपये डूबे

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। जहां चुनावी नतीजों के बाद बाजार में तेजी की उम्मीद थी, वहीं इसके विपरीत सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट देखने को मिली। कारोबार के शुरुआती कुछ घंटों में ही सेंसेक्स 750 अंकों से ज्यादा टूट गया और 77 हजार के स्तर से नीचे फिसल गया। निफ्टी भी करीब 240 अंकों की गिरावट के साथ कमजोर नजर आया। इस गिरावट ने साफ संकेत दिया कि बाजार पर बाहरी दबाव ज्यादा हावी है।
165 मिनट में डूबे लाखों करोड़ रुपये
शेयर बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। महज 165 मिनट के भीतर निवेशकों को लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। बीएसई का मार्केट कैप एक दिन पहले जहां 4.67 लाख करोड़ रुपये के आसपास था, वह गिरकर 4.63 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया। यह गिरावट बताती है कि बाजार में अचानक आई कमजोरी कितनी गहरी थी और निवेशकों का भरोसा किस तरह प्रभावित हुआ।
किन सेक्टर्स और शेयरों पर पड़ा असर
इस गिरावट के दौरान आईटी और मेटल सेक्टर को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर दबाव में रहे। खासतौर पर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। लार्सन एंड टुब्रो के शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि बाजार के विपरीत कुछ शेयरों में तेजी भी दिखी। दवा कंपनी वॉकहार्ट के शेयरों में 10 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया, जबकि रियल एस्टेट कंपनी शोभा के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे ये बड़े कारण जिम्मेदार
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है, जो 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया। अस्थिरता सूचकांक में बढ़ोतरी ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को नीचे खींचने का काम किया।





