EPF और EPS का बड़ा सच आपकी पेंशन कितनी होगी जानकर चौंक जाएंगे

हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी से हर महीने भविष्य निधि यानी PF के नाम पर एक तय रकम काटी जाती है। कई लोग इसे केवल सैलरी कटौती मानते हैं, लेकिन यही पैसा लंबे समय में रिटायरमेंट की सबसे बड़ी आर्थिक सुरक्षा बन सकता है। PF मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा होता है। पहला EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि और दूसरा EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना। EPF एक सेविंग फंड की तरह काम करता है जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों योगदान करते हैं। इस फंड पर हर साल ब्याज भी मिलता है। वर्तमान में EPF पर करीब 8.25 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। दूसरी तरफ EPS रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन देने के लिए बनाया गया सिस्टम है। इसमें अलग से निवेश नहीं दिखता लेकिन कंपनी के योगदान का एक हिस्सा इसमें जमा होता रहता है। यही वजह है कि नौकरी के दौरान कटने वाला PF भविष्य में आर्थिक सहारा बन जाता है।
सैलरी से कितना कटता है और कहां जाता है पैसा
PF की गणना कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए के आधार पर होती है। कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा EPF में जमा होता है। कंपनी भी उतना ही योगदान करती है लेकिन उसका पूरा पैसा EPF में नहीं जाता। कंपनी के योगदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत EPF में जुड़ता है। EPS में जाने वाली रकम की एक अधिकतम सीमा तय होती है जो लगभग 1250 रुपये प्रति माह तक रहती है। यही कारण है कि EPF का फंड तेजी से बढ़ता है जबकि EPS की पेंशन सीमित रहती है। कई कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं होती कि नौकरी बदलने के दौरान PF निकालने से उनका बड़ा नुकसान हो सकता है। क्योंकि बार बार PF निकालने से कंपाउंडिंग का फायदा टूट जाता है और रिटायरमेंट तक बनने वाला बड़ा फंड काफी छोटा हो जाता है।
EPF कैसे बना सकता है करोड़ों का रिटायरमेंट फंड
EPF की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज है। अगर कोई कर्मचारी 30 से 35 साल तक लगातार नौकरी करता है और बीच में PF नहीं निकालता तो उसका फंड करोड़ों तक पहुंच सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी समय के साथ बढ़ती रहती है और वह नियमित योगदान करता रहता है तो रिटायरमेंट तक उसके EPF खाते में 2 करोड़ से 3.5 करोड़ रुपये तक जमा हो सकते हैं। यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ PF को लंबी अवधि का सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। EPF में सरकार की गारंटी भी होती है और ब्याज दरें सामान्य बचत योजनाओं से बेहतर रहती हैं। हालांकि कई लोग नौकरी बदलते समय तुरंत PF निकाल लेते हैं ताकि छोटी जरूरतें पूरी हो जाएं। लेकिन ऐसा करने से भविष्य की बड़ी वित्तीय सुरक्षा कमजोर हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि PF को केवल आपात स्थिति में ही निकालना चाहिए।
EPS पेंशन से हर महीने कितनी मिलेगी रकम
EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना रिटायरमेंट के बाद मासिक आय देने के लिए बनाई गई है। लेकिन इसकी गणना एक तय फार्मूले से होती है और इसमें अधिकतम सैलरी सीमा 15 हजार रुपये मानी जाती है। यही कारण है कि लंबे समय तक नौकरी करने के बाद भी ज्यादातर कर्मचारियों को 8 से 9 हजार रुपये महीने तक की पेंशन मिलती है। फिलहाल न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये तय है हालांकि इसे बढ़ाकर 3000 रुपये करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। EPS का लाभ लेने के लिए कम से कम 10 साल नौकरी करना जरूरी होता है। 58 साल की उम्र के बाद पूरी पेंशन शुरू होती है जबकि 50 साल की उम्र के बाद कम पेंशन के साथ इसे शुरू किया जा सकता है। ऐसे में साफ है कि EPF और EPS दोनों मिलकर रिटायरमेंट सुरक्षा का मजबूत आधार बनाते हैं लेकिन बेहतर भविष्य के लिए केवल PF पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता। वित्तीय योजना और अतिरिक्त निवेश भी उतने ही जरूरी हैं।





