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शेयर बाजार में हड़कंप निफ्टी 23,500 तक गिर सकता है बड़ा खतरा

इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी करीब 2 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। शुक्रवार को निफ्टी 275 अंक यानी 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 23,898 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी, ऑटो और कंज्यूमर स्टॉक्स में भारी बिकवाली रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तीन सत्रों से जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनावों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

टेक्निकल संकेत कमजोर, निफ्टी 23,500 की ओर खिसकने का खतरा

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी अब कमजोर ट्रेंड में प्रवेश कर चुका है। इंडेक्स ने 100-दिन के ईएमए के पास रुकावट का सामना करने के बाद अपनी तेजी खो दी और 24,000 के नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अब अगला प्रमुख सपोर्ट स्तर 23,500 के आसपास है, जबकि 24,200 एक मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि यह स्तर पार नहीं हुआ तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

फेड मीटिंग और कॉरपोरेट रिजल्ट्स से तय होगा बाजार का रुख

इस सप्ताह वैश्विक और घरेलू स्तर पर कई अहम घटनाएं बाजार की दिशा तय करेंगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग 28 अप्रैल से शुरू होकर 29 अप्रैल को समाप्त होगी, जिसमें ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है। इसके अलावा 200 से अधिक कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे भी जारी होंगे, जिनमें कोल इंडिया, मारुति सुजुकी, एचयूएल और बजाज फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन नतीजों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

ग्लोबल तनाव, कच्चा तेल और FII बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

ईरान-इजरायल और अमेरिका से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस महीने भारी बिकवाली की है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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